संदेश

शैलपुत्री लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

मां नव दुर्गा के रूपों की महत्वत्ता 🙏🇮🇳

चित्र
नव दुर्गा।। शैलपुत्री- सम्पूर्ण जड़ पदार्थ भगवती का पहला स्वरूप है। पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि, आकाश सब शैल पुत्री का प्रथम रूप हैं। इस पूजन का अर्थ है प्रत्येक जड़ पदार्थ में परमात्मा को अनुभव करना। ब्रह्मचारिणी - जड़ में ज्ञान का प्रस्फुरण, चेतना का संचार भगवती के दूसरे रूप का प्रादुर्भाव है। जड़ चेतन का संयोग है। प्रत्येक अंकुरण में इसे देख सकते हैं। चन्द्रघण्टा -भगवती का तीसरा रूप है यहाँ जीव में वाणी प्रकट होती है जिसकी अंतिम परिणिति मनुष्य में बैखरी (वाणी) है। कूष्मांडा - अर्थात अंडे को धारण करने वाली। स्त्री ओर पुरुष की गर्भधारण, गर्भाधान शक्ति है जो भगवती की ही शक्ति है। जिसे समस्त प्राणियों में देखा जा सकता है। स्कन्दमाता - पुत्रवती माता-पिता का स्वरूप है अथवा प्रत्येक पुत्रवान माता-पिता स्कन्द माता के रूप हैं। कात्यायनी- के रूप में वही भगवती कन्या की माता-पिता हैं। यह देवी का छठा स्वरुप है। कालरात्रि- देवी भगवती का सातवां रूप है जिससे सब जड़ चेतन मृत्यु को प्राप्त होते हैं ओर मृत्यु के समय सब प्र...