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पाप मेरे नू तकड़ी च पा के रहमत दे वट्टेय‌ां नाल तोल दातिये

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पाप मेरे नू तकड़ी च पा के रहमत दे वट्टेय‌ां नाल तोल दातिये (२) तेरी रहमत दे नालों पाप मेरे ने पारे । तेरी रहमत दे नालों पाप मेरे ने पारे । तू नर्का दे विच न रोल – रोल दातिए । मैनू नर्का दे विच न रोल – रोल दातिए ।। पाप मेरे नू तकड़ी च पा के रहमत दे वट्टेय‌ां नाल तोल दातिये (२) चढ़ चढ़ के मां चढ़ाइयां पैरा नू पै गए शाले । चढ़ चढ़ के मां चढ़ाइयां पैरा नू पै गए शाले । मैनू रोक दे पुजारी तेरी पूजा करण वाले । मां मैनू रोक दे पुजारी तेरी पूजा करण वाले ।। ओ मैनू दे जा दिलासा मैं हां दर दा प्यासा । ओ मैनू दे जा दिलासा मैं हां दर दा प्यासा । आज मेरे कोलो मुखड़ा ना मोड़ ना मोड़ दातिये ।।   पाप मेरे नू तकड़ी च पा के रहमत दे वट्टेय‌ां नाल तोल दातिये (२) तेरे बिना मैया जी मेरा होर कोई ना सहारा । तेरे बिना मैया जी मेरा होर कोई ना सहारा । मेरी डूबडी जांदी नया एक तू ही है सहारा । मेरी डूबडी जांदी नया एक तू ही है सहारा ।। मेरी कट दे चौरासी दूर कर दे उदासी –२ आज मेरे नाल हस के तू बोल – बोल दातीये ।। पाप मेरे नू तकड़ी च पा के रहमत दे वट्टेय‌ां नाल तोल दातिये (२) पाप मेरे नू तकड़ी च पा के रहमत दे वट्टे...

बेटा बुलाए झट दौड़ी चली आए माँ

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#बेटा बुलाए झट दौड़ी चली आए #माँ, अपने #बच्चो के #आँसू देख नहीं पाए माँ, बेटा बुलाए झट #दौड़ी चली आए माँ॥ #वेद_पुराणो में भी माँ की महिमा का बखान है। वो झुकता #माँ_चरणों में जिसने रचा जहान है। देवर्षि भी समझ ना पाए ऐसी #लीला रचाए माँ। बेटा बुलाए झट दौड़ी चली आए माँ॥ संकट हरनी #वरदानी_माँ सबके दुखड़े दूर करे। शरण आए दिन दुखी की #विनती माँ मंजूर करे। सारा जग जिसको #ठुकरादे उसको #गले लगाए माँ। बेटा बुलाए झट दौड़ी चली आए माँ॥ बिगड़ी तेरी बात बनेगी #माँ_की_महिमा गा के देख। खुशियों से भर जाएगा तू #झोली तो फैलाके देख। झोली छोटी पड़ जाती है जब देने पे आए माँ। बेटा बुलाए झट दौड़ी चली आए माँ॥ कबसे तेरी #कचहरी में माँ लिख कर दे दी अर्जी। अपना ले चाहे ठुकरा दे आगे तेरी #मर्जी। #लख्खा शरण खड़ा हथ जोड़े जो भी #हुकुम सुनाए माँ। बेटा बुलाए झट दौड़ी चली आए माँ॥ बेटा बुलाए झट दौड़ी चली आए #माँ, अपने #बच्चो के #आँसू देख नहीं पाए माँ, बेटा बुलाए झट #दौड़ी चली आए माँ #नवरात्रि #भजन_कीर्तन #जयमातादी #जय_माता_दी

माता सिद्धिदात्री की कथा।।

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माँ दुर्गा की नौवीं शक्ति का नाम सिद्धिदात्री हैं। ये देवी सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली हैं। ऐसी मान्यता है कि इस दिन शास्त्रीय विधि-विधान और पूर्ण निष्ठा के साथ साधना करने वाले भक्तों को सभी तरह की सिद्धियां प्राप्त होती है। सिद्धिदात्री के दाहिनी तरफ नीचे वाले हाथ में चक्र, ऊपर वाले हाथ में गदा तथा बायीं तरफ के नीचे वाले हाथ में शंख और ऊपर वाले हाथ में कमल का पुष्प है। इनका वाहन सिंह है और यह कमल पुष्प पर भी आसीन होती हैं। नवरात्र की यह अंतिम देवी हैं। हिमाचल के नंदापर्वत पर इनका प्रसिद्ध तीर्थ है। देवी सिद्धिदात्री सर्व सिद्धियां प्रदान करने वाली है और माना जाता है इनकी पूजा से सभी देवियों की उपासना भी स्वंय हो जाती है। इनकी कृपा मात्र से कठिन से कठिन कार्य भी आसानी से संभव हो जाते हैं। अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व आठ सिद्धियां इनकी सच्चे मन से पूजा अर्चना से प्राप्त की जाति है। पुराणों के अनुसार भगवान शिव ने भी इस देवी की कृपा से यह तमाम सिद्धियां प्राप्त की थीं। इस देवी की कृपा से ही भगवान शिव जी का आधा शरीर देवी का हुआ...

माता के शक्तिपीठ की स्थापना कैसे हुई़?

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माता रानी के 51 शक्तिपीठ इस पृथ्वी पर मौजूद हैं। जिनकी अपार महिमा है और दर्शन मात्र से ही भक्तों की बिगड़ी संवर जाती है। इन सभी शक्तिपीठों की स्थापना आखिर कैसे हुई? कैसे हुआ इन दिव्य स्थलों का निर्माण? जब जब पृथ्वी पर अधर्म बढ़ा और पाप के बोझ से धरती थर्राने लगी तब तब देवी मां ने अलग अलग रूप धर पापियों का विनाश किया और पृथ्वी और मनुष्य का उद्धार किया। ऐसा ही मां का एक रूप सती भी था। जो की भगवान शिव की अर्धांगिनी बनीं और जन कल्याण किया। मां के इसी रूप के 51 शक्तिपीठ इस पृथ्वी पर मौजूद हैं। देवी सती प्रजापति दक्ष की पहली पत्नी प्रसूति के गर्भ से जन्मी थीं। जिनका विवाह कैलाश स्वामी प्रभु शिव जी से हुआ। हालांकि उनके पिता राजा दक्ष इस विवाह के खिलाफ थे लेकिन पुत्री की ज़िद के कारण उन्हें उन दोनों का विवाह कराना पड़ा। पौराणिक कथाओं के अनुसार एक बार राजा दक्ष ने भव्य यज्ञ का आयोजन किया था जिसमें देव लोक से सभी देवी-देवताओं को आमंत्रित किया। लेकिन माता सती और भगवान शिव को इसमें आने का निमंत्रण नहीं भेजा गया। जब माता सती को इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने भगवान...

ईश्वर के साक्षात्कार से जुड़ी एक जीवन घटना🙏🇮🇳

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अगर कोई व्यक्ति कहता है कि उसे जीवन में कभी ईश्वर का साक्षात्कार नहीं हुआ तो यह संभव है हर व्यक्ति को कभी ना कभी जीवन में ईश्वर का साक्षात्कार जरूर होता है किंतु जब तक उसे समझ आती है तब तक बहुत देर हो चुकी ऐसी ही एक घटना मेरे साथ भी हुई। तकरीबन 10–12 साल पहले की बात है। राखी के दिन थे, मैंने मेेरे एक दोस्त से कहा कि इस साल राखी पर हम वैष्णो देवी के दरबार चलते है। मैं माता वैष्णो देवी को अपनी बहन मानता हूं तो दिल ने कहा कि इस राखी माता वैष्णो देवी से ही बनवाए गे। पूरी प्लैनिंग हो ग्यी जिस दिन जाना था पहले ऐसा लगा जैसे पांव मेें सुइयां सी चुब रही है पर मन में विश्वास था लेकिन थोड़ी देर बाद ऑफिस से निकला तो सीढ़ियों मेें से गिर गया। पांव मेें सोजिश हो गई एैसे लगा जैसे कोई जाने से रोक रहा हो। पास ही एक पहलवान को दिखाया उसने बोला एक दो दिन में चलने लायक हो जाओ गए। घर पंहुचा तो Cousin Sister आ रखी थी वोह बोली देखा माता रानी भी कहती की घर पर रहो, पर दिल ना माना। रात की ट्रेन की टिकट थी मैं और मेरे दोस्त चल पड़े मां के दरबार मन में आस लिए कि मां के दरबार पर को धागे लेकर जा रहे है उ...