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दुश्मन की आधी शक्ति खींचने वाला बाली जब युद्ध मेें श्री राम भक्त हनुमान के सम्मुख आया तो क्या हुआ?

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रामायण काल में एक से एक महान योद्धा हो जिनमें से बाली भी एक है किष्किंधा नरेश बाली देवराज इंद्र के धर्म पुत्र थे। उनके पास एक ऐसी महान शक्ति थी जिसके कारण बड़े से बड़ा शूरवीर भी उनसे हार जाता। पौराणिक कथाओं के अनुसार बाली को यह शक्ति देवराज इंद्र द्वारा प्रदान की गई देवराज इंद्र ने बाली को एक स्वर्ण हार प्रदान किया जिसे ब्रह्मा जी द्वारा मंत्र युक्त किया गया। जिसके अनुसार बाली जिस भी युद्ध में इस हार को पहन कर जाए गा तो सामने वाले की आधी शक्ति उसमे स्मा जाए गी जिस कारण बाली कभी युद्ध में नही हारा और लगभग अजय हो गया। बाली ने अपनी इस अद्भुत शक्ति के बल पर कभी महान योद्धाओं को धूल चटाई। इसी शक्ति के बल पर बाली ने हजार हाथियों का बल रखने वाले दुंदुभि नामक असुर का वध कर दिया। दुंदुभि के बाद बाली ने उसके भाई मायावी का भी एक गुफा में वध कर दिया था। रावण ने बाली की शक्ति के चर्चे सुनकर उससे युद्ध के लिए ललकारा जिसके परिणाम स्वरूप बाली ने रावण को अपनी कांख में छह माह तक दबाए रखा था। अंत में रावण ने उससे हार मानकर उसे अपना मित्र बना लिया था। बाली को इस बात का घमंड था कि उ...