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देवी तुलसी जो भगवान विष्णु को सबसे प्रिय है वह श्री गणेश को अप्रिय है और उनकी पूजा में वर्जित है ऐसा क्यों?

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जय श्री गणेश।। पौराणिक कथाओं के अनुसार एक समय माता पार्वती भगवान शिव से श्री गणेश के विवाह के विषय पर चर्चा कर रहे थी। तभी श्री गणेश वहां पर प्रस्तुत हुए और उन्होंने विवाह करने से इंकार कर दिया और कहा कि मैं सदैव ब्रह्मचारी रहना चाहता हूं। यह कह भगवान श्री गणेश वहां से चले गए और गंगा के तट पर तप में लीन हो गए। इसी कालावधि में धर्मात्मज की कन्या तुलसी विवाह की इच्छा लेकर तीर्थ यात्रा पर निकले सभी तीर्थों के दर्शन करते हुए वह उसी गंगा तट पर पहुंची जहां पर श्री गणेश तप में लीन थे। उनके सुंदर रूप और अलौकिक देवता को देखकर वे उन पर मोहित हो गए और उनसे विवाह की ईशा जागृत हुई। देवी तुलसी ने विवाह की इच्छा को जाहिर करते हुए श्री गणेश के तप को भंग कर दिया। श्री गणेश ने कहा कि तभी मैं आपसे विवाह नहीं कर सकता मैं सदैव ब्रह्मचारी रहना चाहता हूं अतः आप मुझसे अपने विवाह की इच्छा त्याग दें। विवाह प्रस्ताव ठुकराया देवी तुलसी ने प्रभु श्री गणेश को शाप दिया कि आपने मेरे विवाह परताप को ठुकराया है अतः आप के 2 स्त्रियों से विवाह होंगे।  श्री गणेश को क्रोध आ गया उन्होंने कहा कि दे...