संदेश

महाकाल लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

भगवान शिव द्वारा भस्मासुर को दिया हुआ वरदान बना उनके लिए मुसीबत 🙏🇮🇳

चित्र
जय महाकाल भगवान शिव को भोलेनाथ कहा जाता है क्योंकि उन पर श्रद्धा से चढ़ाया हुआ एक बिल पत्र भी आपके हर कष्ट हर लेता है। देवों के देव महादेव इतने भोले हैं कि उनकी भक्ति कर उन्हें प्रसन्न करना देव दानव या मानव सबके लिए बड़ा ही आसान है। वह हर भक्त को एक सामान्य दृष्टि से देखते हैं फिर चाहे उनकी भक्ति का वरदान पाने वाला उनके वरदान का दुरुपयोग ही क्यों ना करें। आज की यह कथा भस्मासुर के वरदान से जुड़ी है। भस्मासुर भगवान शिव का अनन्य भक्त था और और बहुत ही बलवान दैत्य था। वे तीनो लोक पर अपना राज्य स्थापित कर इस सृष्टि का सबसे बलवान दैत्य बनना चाहता था। वह जानता था कि उसकी यह इच्छा भगवान शिव की आराधना से ही संपन्न हो सकती थी। इसलिए व्ह एकांत में भगवान शिव की तपस्या में लीन हो गया। भगवान शिव की कठोर तपस्या कर उसने भगवान शिव को प्रसन्न कर लिया। भगवान शिव ने उसे वरदान मांगने के लिए कहा और जैसे कि हर दैत्य अमरता का वरदान मांगते हैं उसने भी भगवान शिव से अमर होने का वरदान मांगा। भगवान शिव भोले की जो व्यक्ति जन्म लेता है उसकी मृत्यु आवश...

श्री संगमेश्र्वर महादेव मंदिर - आरती दर्शन

चित्र
🙏🌹 *🐍ॐजय श्री महाकाल🐍* 🌹🙏 **_*_*ॐ नमः पार्वती पतये__*             *_*हर हर महादेव_*  *श्रंगार आरती ```दर्शन``* `  **  * *28 σctσвєr  2020   Wednesday***  जहाँ पर आकर लोगों की #नवाबी ख़त्म हो जाती है, बस वहीं से #महाकाल के #दीवानों की #बादशाही शुरू होती है..! #jaimahakal  वो लम्हा …….मेरी ज़िन्दगी का बड़ा अनमोल होता है… मेरे#महाकाल जब तेरी बातें,…तेरी यादें, ..तेरा माहौल होता है.. #जयमहाकाल जिनके रोम-रोम में #शिव हैं  वही #विष पिया करते हैं जमाना उन्हें क्या #जलाएगा जो #श्रृंगार ही #अंगार से किया करते हैं #महादेव  ║ _*जय श्री महाकाल* 🔱🔱🔱🔱🔱🔱🚩 !   *श्री संगमेश्र्वर महादेव मंदिर* *(अरुणाय)पेहोवा,हरियाणा*       *ओम नमः शिवाय*  * *║  *║जय श्री* 🔱꧁༒ *ঔमहाकालঔ*  *शिव - महाकाल* #mahakal #jaimahakal #mahakaleshwar #mahakali #jaishreemahakal #mahakal🙏 #jaymahakal #mahakalfanclub #yamahakalselteng #shree_mahakal #mahakal...

अचलेश्वर धाम के दर्शन🙏🇮🇳

चित्र
*​​Jⓐⓘ Sⓗⓘⓥ *Sⓗⓐⓝⓚⓐⓡ​* *ॐ_नमः_शिवाय्* *ॐ🔱ॐ🔱ॐ🔱ॐ🔱ॐ🔱*  *।।..सच वह दौलत है*  *जिसे पहले ख़र्च करो*  *और ज़िंदगी भर आनंद करों ..।।*   *।।..झूठ वह क़र्ज़ है*  *जिससे क्षणिक सुख पाओ*  *और ज़िंदगी भर चुकाते रहो ..।।*  ※❖═══▩ஜ ۩۞۩ ஜ▩═══❖※  *ईश्वर सत्य है*  *सत्य ही शिव है*  *शिव ही सुंदर है* *●शुक्र है मेरे महादेव तेरा शुक्र है●* ※❖═══▩ஜ ۩۞۩ ஜ▩═══❖※   *🚩अचलेश्वर धाम के दर्शन🚩*  🙏 *ॐ शांति ॐ*🙏  *🐍_जय_महाकाल_🐍_*  *आपका दिन शुभ हो*  🙏🏻 *शुभ प्रभात​*🙏🏻 *🙏🏻हे ईश्वर सबका भला करना।🙏🏻*  🕉 ​ *जय भोले नाथ​* 🕉

भगवान शिव और मां पार्वती की प्रेम कथा।।

चित्र
देवी पार्वती भगवान शिव की अर्दांगनी है। उनका जन्म हिमनरेश हिमवान और रानी मैनावती के घर हुआ। इन्‍हें अनेक नामों से पूजा जाता है जिनमे से उमा, गौरी और सती परमुख है। माता पार्वती प्रकृति स्वरूपा कहलाती हैं। पुराणों के अनुसार पार्वती के जन्म का समाचार सुनकर देवर्षि नारद हिमालय नरेश के घर आये थे और देवी के दर्शन कर उनका बविष्य बताया और कहा इनका विवाह प्रभु शंकर जी से होगा। साथ ही उन्‍होंने ये भी कहा कि महादेव को पति रूप में प्राप्त करने के लिये देवी पार्वती को घोर तपस्या करनी होगी। शंकर जी की प्राप्ति के लिए देवी तपस्या में लीन हुई तो बागवान शंकर ने पार्वती के अपने प्रति प्रेम की परीक्षा लेने के लिये सप्तऋषियों को उनके पास भेजा। जिन्‍होंने देवी के पास जाकर यह समझाने के अनेक प्रयत्न किये कि शिव जी औघड़, अमंगल वेषधारी, जटाधारी और भूत प्रेतों के संगी हैं, इसलिए वह उनके लिए उपयुक्त वर नहीं हैं। शिव जी के साथ विवाह करके आप सुखी नहीं रह पाएंगी अत: वे अपना इरादा बदल दें, किन्तु पार्वती जी अपने निर्णय पर दृढ़ रहीं। यह देखकर सप्तऋषि अत्यन्त प्रसन्न हुए और उन्हें सफल मनोरथ होने का आशीर्वा...

श्री अचलेश्वर धाम और कार्तिकेय स्वामी से जुड़ी कथा।

चित्र
भगवान शिव और माता पार्वती के 2 पुत्र कार्तिक स्वामी और श्री गणेश जिनमें से कार्तिक जी बड़े व गणेश जी छोटे हैं। एक समय माता पार्वती और प्रभु शिव शंकर ने विचार विमर्श कर दोनो बच्चो की योग्यता के आधार पर उनमें से अपना उत्तराधिकारी चुनने का फैसला लिया। भगवान शिव ने दोनो बच्चों को बुलाया और कहा कि तुम दोनो में से जो बुआई तीनो लोक की परिक्रमा कर कैलाश लोटे गए उसे व्ह अपना उतराधिकारी बनाएंगे। कार्तिक स्वामी का वहां मोर है और वोह उनपर सवार हो विश्व भ्रमण पर निकले दूसरी तरफ श्री गणेश का वहां मूशक है और व्ह धीमी घाटी से चलता है अतः श्री गणेश का परिक्रमा कर लूट पाना सम्भव नहीं था। जैसे ही श्री गणेश अपने वाहन पर सवार हो निकले नारद जी उन्हें रोका और पूछा की इतनी जल्दी में कहा जा रहे है तब श्री गणेश ने उन्हें माता पिता की ईशा से अवगत कराया। तब नारद जी बोले की भगवान शिव और माता पार्वती तीन लोको के स्वामी है। उनकी परिक्रमा करना तीन लोको की परिक्रमा समान है। यह बात सुन गणेश जी तुरंत कैलाश गए और माता पिता की परिक्रमा कर उनके सामने हाथ जोड़ खड़े हो गए।...

सम्पूर्ण फल की प्राप्ति के लिए शिव मंत्र🙏🇮🇳

चित्र
प्रभु श्रीराम के इष्ट देव भगवान भोलेनाथ है और भगवान भोलेनाथ के इष्ट देव श्री राम अर्थात दोनों का एक दूसरे से रिश्ता भक्त और भगवान का है। आगर हम भगवान शिव के सन्मुख श्री राम का नाम क्या करेंगे तो प्रभु श्री राम को भगवान दोनों का आशीष प्राप्त होगा इसलिए जब भी आप भगवान भोलेनाथ चढ़ाते हैं तो इस मंत्र के साथ बिल पर चढ़ाएं आपको संपूर्ण लाभ प्राप्त होगा मंत्र है– राम शिव हरे राम शिव हरे राम शिव राम राम शिव हरे भगवान शिव और श्री राम को कृपा आप सब पर बनी रहे। जय महाकाल 🙏🇮🇳

रुद्राक्ष को धारण करने से पहले यह बातें जरूर जान ले।।

चित्र
जय महाकाल 🙏🇮🇳 रुद्राक्ष पोस्टिक एनर्जी का स्त्रोत है अगर आप रुद्राक्ष को धारण करते हैं तो यह आपके आसपास के वातावरण को शुद्ध एवं साफ रखता है जिससे आपकी सोच में निरंतर विकास होता है किंतु अगर आप खुद नेटिविटी अपने पास लाते हैं तो यह भी आप मेन एक्टिविटी फैला देता है। इसलिए रुद्राक्ष को धारण करने से पहले यह बातें जरूर जान ले कि अगर आप "मांस मदिरा" का सेवन करते हैं तो रुद्राक्ष को धारण मत करें। रुद्राक्ष को धारण करने से पहले आपको मांस मदिरा का त्याग करना होगा ताकि यह आपके शारीरिक और आपके आसपास की जो नेग्टिविटी है उसको दूर कर सकें। रुद्राक्ष को भगवान शिव के ऊर्जा पूंज के रूप में जाना जाता है जैसी शक्ति भगवान शिव में पाई जाती हैं उन्हीं का एक अंश रुद्राक्ष में सम्मिलित होता है। किसी जीव की हत्या अपने स्वार्थ के लिए करना यह एक नेटिविटी का मूल स्रोत होता है और यह भगवान शिव को अप्रिय है और जो भगवान शिव को अप्रिय है वही रुद्राक्ष को भी अप्रिय माना जाता है। इसलिए रुद्राक्ष को धारण करने से पहले मांस मदिरा का त्याग करना जरूरी है। रुद्राक्ष को धारण करते...