संदेश

ramayan लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

दुश्मन की आधी शक्ति खींचने वाला बाली जब युद्ध मेें श्री राम भक्त हनुमान के सम्मुख आया तो क्या हुआ?

चित्र
रामायण काल में एक से एक महान योद्धा हो जिनमें से बाली भी एक है किष्किंधा नरेश बाली देवराज इंद्र के धर्म पुत्र थे। उनके पास एक ऐसी महान शक्ति थी जिसके कारण बड़े से बड़ा शूरवीर भी उनसे हार जाता। पौराणिक कथाओं के अनुसार बाली को यह शक्ति देवराज इंद्र द्वारा प्रदान की गई देवराज इंद्र ने बाली को एक स्वर्ण हार प्रदान किया जिसे ब्रह्मा जी द्वारा मंत्र युक्त किया गया। जिसके अनुसार बाली जिस भी युद्ध में इस हार को पहन कर जाए गा तो सामने वाले की आधी शक्ति उसमे स्मा जाए गी जिस कारण बाली कभी युद्ध में नही हारा और लगभग अजय हो गया। बाली ने अपनी इस अद्भुत शक्ति के बल पर कभी महान योद्धाओं को धूल चटाई। इसी शक्ति के बल पर बाली ने हजार हाथियों का बल रखने वाले दुंदुभि नामक असुर का वध कर दिया। दुंदुभि के बाद बाली ने उसके भाई मायावी का भी एक गुफा में वध कर दिया था। रावण ने बाली की शक्ति के चर्चे सुनकर उससे युद्ध के लिए ललकारा जिसके परिणाम स्वरूप बाली ने रावण को अपनी कांख में छह माह तक दबाए रखा था। अंत में रावण ने उससे हार मानकर उसे अपना मित्र बना लिया था। बाली को इस बात का घमंड था कि उ...

शिव तांडव स्त्रोत और रावण।।

चित्र
रावण रावण भगवान शिव का परम भक्त और महा ज्ञानी था वह सदा भगवान शिव को अपने सम्मुख रखना चाहता था। महान शिव भक्त होने के साथ-साथ व्ह त्रिलोक विजेता था जिस कारण उसे अपनी शक्ति पर घमंड था। व्ह सदा भगवान शिव के साक्षात दर्शन करना चाहता था जिस कारण उसने कैलाश पर्वत को उठा कर लंका ले जाना चाहा। उसे अपने बाहुबल पर घमंड था इस कारण उसने कैलाश पर्वत को अपनी बाजुओं से उठाया। कैलाश पर्वत को उठाते ही सारा ब्रह्मांड कापने लगा। सृष्टि का संतुलन बिगड़ने लगा, यह देख भगवान शिव को क्रोध आया और उन्होंने ने अपने पांव के अंगूठे का बार कैलाश पर्वत पर लगाया। जिसके कारण रावण के हाथ कैलाश के नीचे दब गए। वे जोर-जोर से चिल्लाने लगा भगवान शिव से अपनी भूल की क्षमा मांगने लगा, किंतु भगवान शिव को प्रसन्न ना होते देख उसने भगवान शिव को शिव तांडव स्त्रोत के साथ प्रसन्न किया। भगवान शिव के तांडव स्त्रोत का रचयिता स्वयं रावण है दर्द में होने पर भी रावण ने शिव तांडव स्त्रोत को बड़ी ही सुंदरता के साथ प्रस्तुत किया। यह देख भगवान शिव प्रसन्न हो गए और अपना भार हल्का कर दिया, जिससे रावण के हाथ जो कैलाश के न...