शिव तांडव स्त्रोत और रावण।।

रावण रावण भगवान शिव का परम भक्त और महा ज्ञानी था वह सदा भगवान शिव को अपने सम्मुख रखना चाहता था।

महान शिव भक्त होने के साथ-साथ व्ह त्रिलोक विजेता था जिस कारण उसे अपनी शक्ति पर घमंड था।

व्ह सदा भगवान शिव के साक्षात दर्शन करना चाहता था
जिस कारण उसने कैलाश पर्वत को उठा कर लंका ले जाना चाहा।
उसे अपने बाहुबल पर घमंड था इस कारण उसने कैलाश पर्वत को अपनी बाजुओं से उठाया।

कैलाश पर्वत को उठाते ही सारा ब्रह्मांड कापने लगा।
सृष्टि का संतुलन बिगड़ने लगा,
यह देख भगवान शिव को क्रोध आया और उन्होंने ने अपने पांव के अंगूठे का बार कैलाश पर्वत पर लगाया।

जिसके कारण रावण के हाथ कैलाश के नीचे दब गए।
वे जोर-जोर से चिल्लाने लगा भगवान शिव से अपनी भूल की क्षमा मांगने लगा,
किंतु भगवान शिव को प्रसन्न ना होते देख उसने भगवान शिव को शिव तांडव स्त्रोत के साथ प्रसन्न किया।
भगवान शिव के तांडव स्त्रोत का रचयिता स्वयं रावण है
दर्द में होने पर भी रावण ने शिव तांडव स्त्रोत को बड़ी ही सुंदरता के साथ प्रस्तुत किया।
यह देख भगवान शिव प्रसन्न हो गए और अपना भार हल्का कर दिया, जिससे रावण के हाथ जो कैलाश के नीचे दबे थे वह सुरक्षित बाहर आ गए।
रावण ने भगवान शिव से क्षमा याचना की ओर उनके परम भक्त का पद प्राप्त किया।
कहा जाता है कि रावण का जोर जोर से दहाड़ना शिव तांडव स्तोत्र को बड़े ही सुंदरता के साथ प्रस्तुत करना भगवान शिव को अति प्रिय लगा और रावण नाम रावण को भगवान शिव ने ही दिया।
जिसका अर्थ होता है जोर-जोर से दहाड़ना।

भगवान शिव की असीम कृपा आप सब पर बनी रहे आप पर भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करें।

हर हर महादेव।।

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