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भभूती रमाये बाबा भोलेनाथ आए Lyrics of Bhajan in Hindi

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भभूती रमाये बाबा #भोले_नाथ आए, भोले नाथ आए बाबा #डमरू बजाए, भोले नाथ आए बाबा #अलख जगाए। सखी एक बोली #मैया बाहर पधारो, आयो एक बाबो दिखे बड़ो मतवारो, भिक्षा देयीके कहदो आसन पधारो। #भभूती रमाये बाबा भोले नाथ आए..॥ भरी थार कंचन को मैया सिधारी, नमन करीके मैया वचन उचारी, आशीष दीजै #बाबा सुखी भये #मुरारी। भभूती रमाये बाबा भोले नाथ आए..॥ बोले #भोले_बाबा मैया आशीष लीजै, किन्तु एक हेतु मैया सिद्ध करीजै, लायी के लाल मैया #हाथ धरीजै। भभूती #रमाये बाबा भोले नाथ आए...॥ भभूती रमाये बाबा भोले नाथ आए, भोले नाथ आए बाबा #डमरू_बजाए, भोले नाथ आए बाबा अलख जगाए। #हरहरमहादेव #महादेव #महाकाल #हर_हर_महादेव #ॐनमःशिवाय #harharmahadev #bholenath #bholebaba #mahakal

बेलपत्र भगवान शिव को क्यों प्रीय है?

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ॐ श्री रामेश्वर आए नमः बेलपत्र भगवान शिव को अति प्रिय है और इसका साक्षात्कार शास्त्रों में कई पुराणों में मिलता है। एक समय माता पार्वती ने भगवान शिव से पूछा आपको बिल पत्र इतना प्रिय क्यों तब भगवान शिव ने उत्तर दिया। हे शिवे! बिल्व के पत्ते मेरी जटाओं के समान हैं। उसका त्रिपत्र यानी 3 पत्ते ऋग्वेद, यजुर्वेद और सामवेद हैं। शाखाएं समस्त शास्त्र का स्वरूप हैं। बिल्ववृक्ष को आप पृथ्वी का कल्पवृक्ष समझें, जो ब्रह्मा-विष्णु-शिव स्वरूप है। स्वयं महालक्ष्मी ने शैल पर्वत पर बिल्ववृक्ष रूप में जन्म लिया था। यह सुनकर माता पार्वती हैरान हो गई कहा हे स्वामी – देवी लक्ष्मी ने बिल्ववृक्ष का रूप क्यों लिया? इससे जुड़ा क्या रहस्य है कृप्या आप मुझे विस्तार से बताएं? तब भगवान शिव बोले – हे देवी! सतयुग में ज्योतिरूप में मेरा अंश रामेश्वर लिंग के रूप मेें प्रकट हुआ था। ब्रह्मा आदि देवों ने उसका विधिवत पूजन किया और फलत: मेरे अनुग्रह से वाग्देवी सबकी प्रिया हो गईं। वे भगवान विष्णु को सतत प्रिय हो गईं। मेरे प्रभाव से भगवान विष्णु के मन में वाग्देवी के लिए जितनी प्रीति हुई वह देख देवी लक्ष्मी ...