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भगवान शिव द्वारा भस्मासुर को दिया हुआ वरदान बना उनके लिए मुसीबत 🙏🇮🇳

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जय महाकाल भगवान शिव को भोलेनाथ कहा जाता है क्योंकि उन पर श्रद्धा से चढ़ाया हुआ एक बिल पत्र भी आपके हर कष्ट हर लेता है। देवों के देव महादेव इतने भोले हैं कि उनकी भक्ति कर उन्हें प्रसन्न करना देव दानव या मानव सबके लिए बड़ा ही आसान है। वह हर भक्त को एक सामान्य दृष्टि से देखते हैं फिर चाहे उनकी भक्ति का वरदान पाने वाला उनके वरदान का दुरुपयोग ही क्यों ना करें। आज की यह कथा भस्मासुर के वरदान से जुड़ी है। भस्मासुर भगवान शिव का अनन्य भक्त था और और बहुत ही बलवान दैत्य था। वे तीनो लोक पर अपना राज्य स्थापित कर इस सृष्टि का सबसे बलवान दैत्य बनना चाहता था। वह जानता था कि उसकी यह इच्छा भगवान शिव की आराधना से ही संपन्न हो सकती थी। इसलिए व्ह एकांत में भगवान शिव की तपस्या में लीन हो गया। भगवान शिव की कठोर तपस्या कर उसने भगवान शिव को प्रसन्न कर लिया। भगवान शिव ने उसे वरदान मांगने के लिए कहा और जैसे कि हर दैत्य अमरता का वरदान मांगते हैं उसने भी भगवान शिव से अमर होने का वरदान मांगा। भगवान शिव भोले की जो व्यक्ति जन्म लेता है उसकी मृत्यु आवश...

दशहरा और विजय दशमी का महत्व।।

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दशहरा हिंदुओं के प्रमुख त्योहारों में से एक है। भगवान श्री राम ने रावण का इसी दिन वध किया था इसी हर्ष उल्लास को मनाने के लिए दशहरा त्योहार मनाया जाता है। एक और कथा के अनुसार माता दुर्गा नवरात्रि और 10 दिन के उपरांत महिषासुर पर विजय प्राप्त की थी। दशहरा इसी का प्रतीक है अर्थात बुराई पर अच्छाई की जीत और असत्य पर सत्य की जीत। ऐसा माना जाता है कि इस दिन जो भी कार्य किया जाता है उसमें विजय प्राप्त होती है अर्थात किसी भी शुभ और नए कार्य को इस दिन किया जाए तो आप सफल होंगे। पुराने समय में राजे महाराजे इसी दिन पूजा करके युद्ध विजय के लिए प्रस्थान करते थे। इस दिन जगह-जगह पर मेले लगते हैं और रामलीला का त्यौहार मनाया जाता है। रावण का विशाल पुतला बनाकर उसे जलाया जाता है। दशहरा अथवा विजयदशमी भगवान राम की विजय के रूप में मनाया जाता है। दशहरा का पर्व दस प्रकार के पापों- काम, क्रोध, लोभ, मोह मद, मत्सर, अहंकार, आलस्य, हिंसा और चोरी के परित्याग की सद्प्रेरणा प्रदान करता है भगवान श्री राम और मां दुर्गा की कृपा आप सब पर बनी रहे। जय श्री राम 🙏🇮🇳 जय मा...

भगवान शिव और मां पार्वती की प्रेम कथा।।

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देवी पार्वती भगवान शिव की अर्दांगनी है। उनका जन्म हिमनरेश हिमवान और रानी मैनावती के घर हुआ। इन्‍हें अनेक नामों से पूजा जाता है जिनमे से उमा, गौरी और सती परमुख है। माता पार्वती प्रकृति स्वरूपा कहलाती हैं। पुराणों के अनुसार पार्वती के जन्म का समाचार सुनकर देवर्षि नारद हिमालय नरेश के घर आये थे और देवी के दर्शन कर उनका बविष्य बताया और कहा इनका विवाह प्रभु शंकर जी से होगा। साथ ही उन्‍होंने ये भी कहा कि महादेव को पति रूप में प्राप्त करने के लिये देवी पार्वती को घोर तपस्या करनी होगी। शंकर जी की प्राप्ति के लिए देवी तपस्या में लीन हुई तो बागवान शंकर ने पार्वती के अपने प्रति प्रेम की परीक्षा लेने के लिये सप्तऋषियों को उनके पास भेजा। जिन्‍होंने देवी के पास जाकर यह समझाने के अनेक प्रयत्न किये कि शिव जी औघड़, अमंगल वेषधारी, जटाधारी और भूत प्रेतों के संगी हैं, इसलिए वह उनके लिए उपयुक्त वर नहीं हैं। शिव जी के साथ विवाह करके आप सुखी नहीं रह पाएंगी अत: वे अपना इरादा बदल दें, किन्तु पार्वती जी अपने निर्णय पर दृढ़ रहीं। यह देखकर सप्तऋषि अत्यन्त प्रसन्न हुए और उन्हें सफल मनोरथ होने का आशीर्वा...

शिव तांडव स्त्रोत और रावण।।

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रावण रावण भगवान शिव का परम भक्त और महा ज्ञानी था वह सदा भगवान शिव को अपने सम्मुख रखना चाहता था। महान शिव भक्त होने के साथ-साथ व्ह त्रिलोक विजेता था जिस कारण उसे अपनी शक्ति पर घमंड था। व्ह सदा भगवान शिव के साक्षात दर्शन करना चाहता था जिस कारण उसने कैलाश पर्वत को उठा कर लंका ले जाना चाहा। उसे अपने बाहुबल पर घमंड था इस कारण उसने कैलाश पर्वत को अपनी बाजुओं से उठाया। कैलाश पर्वत को उठाते ही सारा ब्रह्मांड कापने लगा। सृष्टि का संतुलन बिगड़ने लगा, यह देख भगवान शिव को क्रोध आया और उन्होंने ने अपने पांव के अंगूठे का बार कैलाश पर्वत पर लगाया। जिसके कारण रावण के हाथ कैलाश के नीचे दब गए। वे जोर-जोर से चिल्लाने लगा भगवान शिव से अपनी भूल की क्षमा मांगने लगा, किंतु भगवान शिव को प्रसन्न ना होते देख उसने भगवान शिव को शिव तांडव स्त्रोत के साथ प्रसन्न किया। भगवान शिव के तांडव स्त्रोत का रचयिता स्वयं रावण है दर्द में होने पर भी रावण ने शिव तांडव स्त्रोत को बड़ी ही सुंदरता के साथ प्रस्तुत किया। यह देख भगवान शिव प्रसन्न हो गए और अपना भार हल्का कर दिया, जिससे रावण के हाथ जो कैलाश के न...