बेलपत्र भगवान शिव को क्यों प्रीय है?
ॐ श्री रामेश्वर आए नमः
बेलपत्र भगवान शिव को अति प्रिय है और इसका साक्षात्कार शास्त्रों में कई पुराणों में मिलता है।
एक समय माता पार्वती ने भगवान शिव से पूछा आपको बिल पत्र इतना प्रिय क्यों तब भगवान शिव ने उत्तर दिया।
हे शिवे! बिल्व के पत्ते मेरी जटाओं के समान हैं। उसका त्रिपत्र यानी 3 पत्ते ऋग्वेद, यजुर्वेद और सामवेद हैं। शाखाएं समस्त शास्त्र का स्वरूप हैं। बिल्ववृक्ष को आप पृथ्वी का कल्पवृक्ष समझें, जो ब्रह्मा-विष्णु-शिव स्वरूप है। स्वयं महालक्ष्मी ने शैल पर्वत पर बिल्ववृक्ष रूप में जन्म लिया था।
यह सुनकर माता पार्वती हैरान हो गई कहा हे स्वामी – देवी लक्ष्मी ने बिल्ववृक्ष का रूप क्यों लिया? इससे जुड़ा क्या रहस्य है कृप्या आप मुझे विस्तार से बताएं?
तब भगवान शिव बोले – हे देवी! सतयुग में ज्योतिरूप में मेरा अंश रामेश्वर लिंग के रूप मेें प्रकट हुआ था। ब्रह्मा आदि देवों ने उसका विधिवत पूजन किया और फलत: मेरे अनुग्रह से वाग्देवी सबकी प्रिया हो गईं। वे भगवान विष्णु को सतत प्रिय हो गईं।
मेरे प्रभाव से भगवान विष्णु के मन में वाग्देवी के लिए जितनी प्रीति हुई वह देख देवी लक्ष्मी चिंतित और रुष्ट होकर परम उत्तम श्री शैल पर्वत पर चली गईं। वहां उन्होंने मेरे लिंग विग्रह की उग्र तपस्या प्रारंभ कर दी।
हे शिवे! कुछ समय पश्चात महालक्ष्मी ने मेरे लिंग विग्रह से थोड़ा ऊर्ध्व में एक वृक्ष का रूप धारण कर लिया और अपने पत्र-पुष्प द्वारा निरंतर मेरा पूजन करने लगीं। इस तरह उन्होंने 1 करोड़ वर्ष तक आराधना की।
अंतत: उन्हें मेरा अनुग्रह प्राप्त हुआ। महालक्ष्मी ने मुझसे वरदान मांगा कि श्रीहरि के हृदय में मेरे प्रभाव से वाग्देवी के लिए जो स्नेह हुआ है, वह समाप्त हो जाए।
तब मैंने महालक्ष्मी को समझाया कि श्रीहरि के हृदय में आपके अतिरिक्त किसी और के लिए प्रेम नहीं है। वाग्देवी के प्रति तो उनकी श्रद्धा है। यह सुनकर देवी लक्ष्मी जी प्रसन्न हो गईं और पुन: श्री विष्णु के हृदय में स्थित होकर निरंतर उनके साथ विहार करने लगीं।
श्री हरी को पुनः प्राप्त कर वह उसी वृक्ष रूप में सदा मेरी पूजा अर्चना करने लगी। बिल्व इस कारण मुझे बहुत प्रिय है और मैं बिल्ववृक्ष का आश्रय लेकर रहता हूं।
बिल्व वृक्ष को सदा सर्व तीर्थमय एवं सर्व देवमय मानना चाहिए। इसमें तनिक भी संदेह नहीं है। बिल्वपत्र, बिल्व फूल, बिल्व वृक्ष अथवा बिल्व काष्ठ के चंदन से जो मेरा पूजन करता है, वह भक्त मेरा प्रिय है। बिल्व वृक्ष को शिव के समान ही समझो। वह मेरा शरीर है।
जो बिल्व पर चंदन से मेरा नाम अंकित करके मुझे अर्पण करता है, मैं उसके सभी पापों को क्षमा कर उसे हर दुख से मुक्त करके अपने लोक में स्थान देता हूं। उस व्यक्ति को स्वयं लक्ष्मीजी भी नमस्कार करती हैं। जो बिल्वमूल में प्राण छोड़ता है, उसको रुद्र देह प्राप्त होता है।
हर हर महादेव 🙏🇮🇳
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