श्री अचलेश्वर धाम और कार्तिकेय स्वामी से जुड़ी कथा।
भगवान शिव और माता पार्वती के 2 पुत्र कार्तिक स्वामी और श्री गणेश जिनमें से कार्तिक जी बड़े व गणेश जी छोटे हैं।
एक समय माता पार्वती और प्रभु शिव शंकर ने विचार विमर्श कर दोनो बच्चो की योग्यता के आधार पर उनमें से अपना उत्तराधिकारी चुनने का फैसला लिया।
भगवान शिव ने दोनो बच्चों को बुलाया और कहा कि तुम दोनो में से जो बुआई तीनो लोक की परिक्रमा कर कैलाश लोटे गए उसे व्ह अपना उतराधिकारी बनाएंगे।
कार्तिक स्वामी का वहां मोर है और वोह उनपर सवार हो विश्व भ्रमण पर निकले दूसरी तरफ श्री गणेश का वहां मूशक है और व्ह धीमी घाटी से चलता है अतः श्री गणेश का परिक्रमा कर लूट पाना सम्भव नहीं था।
जैसे ही श्री गणेश अपने वाहन पर सवार हो निकले नारद जी उन्हें रोका और पूछा की इतनी जल्दी में कहा जा रहे है तब श्री गणेश ने उन्हें माता पिता की ईशा से अवगत कराया। तब नारद जी बोले की भगवान शिव और माता पार्वती तीन लोको के स्वामी है। उनकी परिक्रमा करना तीन लोको की परिक्रमा समान है।
यह बात सुन गणेश जी तुरंत कैलाश गए और माता पिता की परिक्रमा कर उनके सामने हाथ जोड़ खड़े हो गए। भगवान शिव ने गणेश जी की बुद्धि से प्रभावित होकर उन्हें अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया।
दूसरी तरफ कार्तिक जी आकाश मार्ग से इस पवित्र स्थान के ऊपर से जा रहे थे तो नारद जी ने उन्हें कैलाश का समाचार सुनाया जिसे सुनकर कार्तिक जी बहुत दुखी हुए। कार्तिक जी कैलाश जाने का फैसला कर उसी सथान धरती पर उतर तपस्या करने लगे।
कार्तिक जी के फैसले की जानकारी नारद जी ने कैलाश जा भगवान भोलेनाथ को दी तो स्वयं भगवान शंकर और माता पार्वती 33 करोड़ देवी-देवताओं को साथ लेकर कार्तिक जी को मनाने यहां पधारे परंतु कार्तिक जी ने जब कैलाश न जाकर यहीं रहने का निर्णय सुनाया तो भगवान शिव ने उन्हें अचलेश्वर महादेव का नाम देकर नवमी का अधिकारी घोषित कर वरदान दिया कि यहां नवमी का पर्व मनाया जाएगा जिसमें 33 करोड़ देवी-देवता पधारेंगे और जो भी श्रद्धालु लगातार 40 दिन पवित्र सरोवर में स्नान कर सच्चे मन से पूजा-अर्चना करेगा उसे शिव धाम की प्राप्ति होगी और है मनोकामना पूर्ण होगी।
अचलेश्वर धाम बटाला शहर से 7 km की दूरी पर है। यहां हर दिवाली के 9 दिन बाद नवमी दसमीं का विशाल मेला लगता है जिसमे देश विदेश के लोग पवित्र सरोवर में स्नान कर पुण्य का बागी बनते है।
कलियुग में इसी स्थान की शोभा सुन पहली पातशाही साहिब श्री गुरु नानक देव जी यहां पधारे जिनका प्राचीन ग्रंथों में भी विवरण है।
विशाल सरोवर के बीचों-बीच गंगाधारी भगवान शंकर का विशाल मंदिर, किनारे पर कार्तिक जी का प्राचीन एवं ऐतिहासिक मंदिर और दूसरी तरफ विशाल गुरुद्वारा देश के आपसी प्यार व भाईचारे की महान संस्कृति को दर्शाते हैं।
भगवान शिव और कार्तिक स्वामी के दर्शन को ज़रूर आए।।
भगवान शिव और कार्तिक स्वामी कि कृपा आप सब पर बनी रहे।।
जय महाकाल🙏🇮🇳
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